Tag Archives: छवि

JINDGI (Part 4

पूरी रात इस सिलसिले में ही गुज़र गई , अगली सुबह वो फिर वॉक के लिए निकला वह चाहें या ना चाहें उसके कदमों को तो उसी रास्ते से जाना था कदम कब उस रास्ते की ओर मुड़ते चले गए इसकी ख़बर कदमों को ना हुई तो उसे क्या होती । आंखों को भी गुस्ताखी… Read More »