shimla ki haseen wadiyan

By | September 30, 2021

शिमला के हसीन वादियों का क्या कहना खासकर जब गर्मी जाने वाली हो और ठंड की दस्तक हो रही हो रीमा अपनी सुबह की चाय और अखबार लिए हुए बाहर अपने गार्डन में आई । क्या हसीन नज़ारा है ओंस कि बूंदे हरी घास पे मोतियों की तरह चमक रही थी । सूरज की रोशनी अभी मध्यम है । सामने पहाड़ों को देखो तो लगता है कि सफेद बादल उसी के पीछे है ।

शिमला के हसीन वादियां लेखक विष्णु तिवारी

रीमा ने अपने नौकर को आवाज़ लगाई – राजू

जी मालकिन – राजू बोला

इस टेबल और कुर्सी को तुमने आज सुबह साफ नहीं किया था ?

रामू – मै भूल गया था ।

रीमा – तो इसे अभी साफ कर दो ।

रीमा आदेश देने के बाद पार्क में ही टहलने लगी और कुछ समय बाद सूरज के तरफ मुंह करके अपनी दोनों बाहें फैला कर आंखे बंद कर के उस पल को अपने में समेटती हुई खड़ी हो गई । रामू अपना काम ख़तम कर के अंदर घर के काम में लग गया था ,कुछ देर बाद फोन की घंटी बजती है । रामू फोन उठाता है और सुनने के बाद बाहर आया तो देखा कि मैडम उसी पोज में है जिस पोज में छोड़ गया था । कुछ देर के लिए वो सोच में पड़ गया कि कहूं या ना , कहूंगा तो इनका ध्यान टूट जाएगा और ये मुझे डातेंगी लेकिन उन साहब को बोल आया हूं कि बाहर ही है बुलता हूं अब क्या करू

कुछ समय बाद वो रीमा को पुकारता है और बोलता है कि आपके लिए फोन है । रीमा ने पूछा कि किसका है तो बोला – वो मै नाम भुला गया ।

रीमा राजू को देख कर मुस्कुराती हुई घर के अंदर चली गई , फोन उठाया तो हेल्लो हेल्लो कि आवाज़ आ रही थी , हेल्लो राजू ,हेल्लो , अरे कहा मर गया

रीमा फोन उठाने के बाद थोड़ी देर के लिए चुप ही रही और सारी बातें सुनती रही और हस्ती रही , आख़िरी में जब हसीं बर्दाश्त के बाहर हो गई तो बोली।

 

रीमा – जी बोलिए ।

समीर – इतनी देर कौन लगता है यार , और ये राजू कहा मर गया था ।

रीमा – गुस्सा क्यों हो रहे हो , वो मुझे ही बुलाने के लिए गया हुए था ।

समीर – और वो मेरा नाम भूल गया होगा है न

रीमा – जी ये तो है

समीर – आने दो मुझे सबसे पहले अपना नाम ही याद करवाऊंगा उससे । मालिक का नाम कौन भूलता है यार

रीमा – तो मालिक को घर पे रहना चाहिए न ।

समीर – है कुछ मज़बूरिया जो हमे मिलने से रोक रही है ।

रीमा – और ये मजबूरियां कब खत्म होगी

समीर – ऑफिस से निकाल गया हूं 15 मिनट में पहुंच जाऊंगा ।

रीमा – जी ठीक है ।

तभी पीछे से गोली चलने की आवाज़ आती है। समीर रीमा से पूछता है की क्या हुआ ,कौन है ,पर रीमा कुछ जावाब नहीं देती समीर फोन पर हेलो रीमा तुम मुझे सुन रही हो रीमा कहां गई तुम, जोर से चिल्लाने लगता है। समीर गाड़ी को तेज चलाना चाहता है मगर ट्रैफिक इतनी है कि वह तेज नहीं चला पाता। समीर गुस्से से भर जाता है और सरकार और उसके नियम कायदे सभी को कोसने लगता है, समीर हॉर्न पर हॉर्न बजाने लगा आसपास के लोग उसे ऐसे देखते कि जैसे पागल हो गया हो। जैसे तैसे करके समीर अपने घर पर पहुंचता है। घर पहुंचते के साथ ही वह रीमा और राजू का नाम चिल्लाने लगता है जब कोई बाहर नहीं आया तो उसकी बेचैनी और बढ़ गई सीढ़ियां चढ़कर के वह घर के दरवाजे तक पहुंचा । गेट खोला तो उसे कोई भी नजर नहीं आया फोन का रिसीवर नीचे गिरा हुआ ।

फर्श पर खून बिखरा हुआ है ।वह चिल्लाने लगा रीमा राजू कहां हो तुम रीमा, सीढ़ियां चढ़ते हुए वह पहले अपने कमरे में गया कमरे में देखा तो सब सामान वैसे के वैसे ही पड़ा हुआ था किसी ने उसके सामान से छेड़छाड़ नहीं की थी इसके बाद वह दूसरे कमरे में गया फिर इसी तरीके से करते उसने पूरा घर छान मारा कहीं पर उसे कुछ नजर नहीं आया। वह कमरे देखता गया और रीमा राजू के नाम की पुकार लगाता गया। उसे कुछ समझ में ही नहीं आ रहा था कि क्या हो गया , बैठ के सोचने लगा कि – सब कहां गए, सामान सभी अपनी जगह है सारी चीजें सुरक्षित है तो फिर यह गोली चलने की आवाज आई कहां से। आखिर कौन मेरा दुश्मन हो सकता है कहीं राजू ने तो ल रीमा को, नहीं नहीं राजू ऐसा नहीं कर सकता उसमें इतनी हिम्मत कहां है कोई और होगा कहीं परसों जीस से लड़ाई हुई थी वह तो नहीं था लेकिन उसे कैसे घर पता होगा, सामने टंगी हुई रीमा की तस्वीर को उतार कर गोद में रखकर तस्वीर को देखते रोने लगा कुछ समझ में ही नहीं आ रहा था , कि क्या करू ।

सहसा कुछ गिरने की आवाज़ आयी तो मेरा ध्यान टूटा यह आवाज कहां से आई मैं फिर से चिल्लाने लगा रिमा , राजू कौन है , रिमा कहा हो तुम देखो अगर ये कोई मज़ाक है तो बहुत बुरा है । फिर से कुछ आवाज़ आई तो मै चौक गया । फिर ध्यान आया कि आवाज़ नीचे बेसमेंट से आ रही है । मै हाथ में डंडा लिए हुए बेसमेंट में जाने लगा नीचे सीढ़ियों पर उतरने लगा और रीमा को आवाज़ देने लगा ,रिमा ,रिमा कहा हो तुम ।लाइट जलाई तो देखा कि सामने काले कलर का पर्दा लगा हुआ है और अंदर अंधेरा है । मैंने डंडे से पर्दा हटाया और लाइट जलाई । तो मेरी आंखे फटी कि फटी रह गई एक मिनट के लिए लगा कि में कोई सपना तो नहीं देख रहा हूं मेरा मुंह खुला का खुला ही रह गया मै कुछ बोल पता इस से पहले वह मौजूद लोगो ने ताली बजाकर खुशी से हैप्पी बर्थडे तो यूं बोलने लगे । मेरी खुशी का ठिकाना ही नहीं रहा थोड़ी देर पहले मेरे साथ क्या हुआ था मैंने क्या किया क्या सोच रहा था मैं यह सारी चीजें मैं भूल गया था वहां मौजूद सभी लोगों ने मुझे हैप्पी बर्थडे विश किया जब मैंने केक काटा काटने के बाद सभी अपने अपने काम में लग गए तब रीमा मेरे पास है मैं उससे बात नहीं करना चाहता था नाराज था मैं पर मुझसे रहा नहीं गया मैंने बोला उससे

समीर – तुम्हें मालूम है मेरी दशा क्या हो गई थी, और यह क्या मजाक है कोई ऐसा सरप्राइस देता है क्या?

रीमा – मेरा कोई ऐसा इरादा नहीं था मैं तो बस तुम्हें सरप्राइस देना चाहती थी।

समीर – और वह बंदूक चलने की आवाज कहां से आई थी, और इसके बाद जब मैंने तुम्हें बोला तो तुमने बोला क्यों नहीं, पता है मैं कितना डर गया था वापस जब घर आया तो देखा कि फोन का रिसीवर नीचे पड़ा हुआ है वहां पर खून पड़ा हुआ है,

रीमा – यह सारा आईडिया राजू का है,

समीर – इसे तो अभी मैं देखता हूं, इन सब कामों में इसका कितना मन लगता है पर जब मेरा फोन आता है तो मेरा नाम भूल जाता है तुम रुको यह राजू है कहां? राजू? छोड़ो उसे तो मैं बाद में देख लूंगा

रिमा -अच्छा सुनो मैंने मैं तुम्हारे लिए कुछ लिखा है

समीर – इरशाद।

रीमा – जब तुम मेरे आगोश में होते हो

मैं खुद को भूल जाती हूं

एक दिल,एक धड़कन,एक सांस हो जाती हूं

जब तुम मेरे आगोश में होते हो

मैं खुद को भूल जाती हूं