JINDGI (Part 4

By | October 12, 2021

पूरी रात इस सिलसिले में ही गुज़र गई , अगली सुबह वो फिर वॉक के लिए निकला वह चाहें या ना चाहें उसके कदमों को तो उसी रास्ते से जाना था कदम कब उस रास्ते की ओर मुड़ते चले गए इसकी ख़बर कदमों को ना हुई तो उसे क्या होती ।
आंखों को भी गुस्ताखी का शौक है ना चाहते हुए उसकी ओर रुख कर बैठी।
दिल में इतने सारे सवाल होने के बाद भी वो आज़ भी हसीन , प्यारी, मासूम, दिल में रहने वाली खूबसूरत बला लग रही थीं, वो कितना भी चाहें मगर उससे दूर नहीं रह सकता था ।
कैसे ना कैसे वो अपने कदमों को घर तक ले आया , कदम मजबूर थें कहीं दिल मजबूर था तो कहीं दिमाग़ और दिल अपनी जंग में मशगूल थे ।

Jindgi part 4
आखिर मुसाफ़िर साहिल पर पहुंचता कैसे दुख गहरे जो थे दरिया के , वो सूरज की तरफ़ देखता कैसे अब क्योंकि उसकी जिंदगी में अंधेरा ही अंधेरा था , उसे उजाला मिलता कैसे किस चिराग़ से वो आगे चलता कैसे उसे तो सफ़र यही खत्म नजर आ रहा था , बस मन चाही मंज़िल नहीं मिली ।
आगे वो किस कश्ती में सवार हो ये वो समझ नहीं पा रहा था , या फिर यहीं इसी दरिया में डूब कर मर जाएं

उसने सोचा यहां से दूर रहना ही ठीक हैं वो अपनी नानी के घर चला गया , वहा न दिन गुज़र रहे थे ना रात ना खाना गले से उतर रहा था न वो लड़की दिल से।
जल्द ही घर वापस आ गया , अगली सुबह का इंतजार न हुआ वो शाम को ही वॉक पर चला गया आज़ सामने पार्क में कुछ बच्चे खेल रहे थे अचानक एक बच्चे की रोने की आवाज़ आई ये उसी का छोटा बेटा था , वो अपने आप को रोक ना सका और उसे जाकर अपनी गोद में उठाया लिया उसे गोद में भर कर चुप कराना चाहा वो आता गया थोड़ा चुप भी हों गया मगर मां के पास जानें कि ज़िद करने लगा वो उसे लेकर उसकी मां के पास लेकर गया उसे शायद अपने सवालों के जवाब मिलना शुरू हों गए ।

हर सवाल का जवाब जैसे आज ही मिल जाना था उसे गोद में लेते ही उसे पता चल गया कि मुझे। इसके करीब जाना है इसे अपना बनाना हैं खिलाना हैं कंधों पर बैठाना है ।

जो उसकी खुशी है उसे अपनी खुशी बनाना है अगर उसे खुशी को अपना बनाना है एक यहीं रास्ता है और हर कोई दिल के आगे हारा है तो उसे भी हारना था ।
जिंदगी ऐसे ही बीतेगी उसके बच्चे मेरे बच्चें होंगे ऐसे ही हम मिल कर उन्हें संभालेंगे साथ में खेलेंगे सोएंगे ता उम्र ऐसे ही हसी खुशी जिंदगी होंगी मैं उनके पिता के जैसा नहीं उनका पिता बन कर दिखाऊंगा हर सवाल का जवाब यू ही सामने था ।

विश्वास उसके सामने था अब हर रोज आते जाते उसके बच्चों के साथ खेल लिया करता था कभी कभी उसके घर भी चाय पीने चला जाता था, और चाय की तारीफ़ करते थकता नहीं था।
उनका परिवार का हिस्सा बनने में उसे देरी ना लगीं उसकी मां का भीं ख्याल रखता था ।
आज पर उसने हिम्मत करके अपने दिल की बात बोल दी वो भी दिल में कुछ ऐसा ही सोचती थी पर उसके सामने अपनी पिछली जिंदगी थीं और उसके बचे कुछ हिस्से जिन्हें वो फेंक नहीं सकती थीं उसकी ज़बान पर इंकार आने ही वाला था जो उसे महसूस हो रहा था पर उसकी आंखों में इकरार देख सकता था इसलिए पहले ही उसके हाथ पकड़ कर उससे कहा , खुशी तुम मेरी जिंदगी की वो खुशी हो जिसे मैं खोना नहीं चाहता और इस वक्त जो सवाल तुम्हारे मन में हैं उनके बारे में मत सोचो बस एक बार मुझ पर विश्वास करो मैं सब कुछ संभाल लूंगा , मेरी आंखों में देखो क्या तुम्हे इन मे प्यार और सच्चाई नज़र नहीं आती ।
वो आगे सुन नहीं सकती थीं उसकी आंखें गीली हो गई क्यूंकि वो उसे अपनी जिंदगी का पूरा सच बता चुकी थीं गीली आंखों के साथ जब वो गिरने को हुई उसने उसे संभाल लिया वो उसके लफ्जों में बह गई।

मन में तो यहीं लग रहा था जैसे दरिया के वो दो किनारे मिल गए जो हमेशा अलग चलते हैं तो तूफ़ान आना ही आना है , पर ये समय ऐसा लग रहा था जैसे चांदऔर तारों से रात भरी हुई है।

अब वो दोनों एक हों चुके थें , दोनों को जैसे जिंदगी की खलिश खत्म होती नज़र आ रही थीं वक्त तेज़ी से गुजरने लगा कितनी रातें कितने दिन कहां गुजरे पता ही नहीं चला । दिन भर की थकन शाम को उसके साथ मिट जाती थीं , ।
उसने डॉक्टरी की पढ़ाई शुरू कर दी पर दोनों ने एक दूसरे को वक्त देना कम नहीं किया शादी भी करने का इंतजार था बच्चे भी उसके करीब थे।

अब विश्वास खुशी का था और खुशी विश्वास की इस मे कोई शक नहीं था ।
मां ने कुछ वक्त बाद दम तोड़ दिया इस वक्त में विश्वास को खुशी के काम आना था उसने उसे संभाल लिया उसके परिवार को संभाल लिया ,
उसका पहला पति भी जो अक्सर उसे परेशान करने आता था अब भी आता था जब तक बच्चे साथ थे उसे तो आना ही था मतलब ये सिलसिला जिंदगी भर चलने वाला था विश्वास को उसका आना बिल्कुल भी पसंद नहीं था पर दोनों ही इसमें कुछ नहीं कर सकते थे क्योंकि उससे जबान लड़ाना जैसे सड़क पर अपनी इज़्ज़त का तमाशा बनाना ।

इस सब से विश्वास परेशान हो चुका था आए दिन उसकी लड़ाई भी खुशी से होने लगीं जैसे उसे ये रिश्ता बोझ लगने लगा वो इस सब से अब आजाद होना चाहता था पर शायद उसे छोड़ना इतना आसान नहीं था।
पांच साल का साथ था उनका यू तोड़ा नहीं जा सकता था तोड़ना भी चाहता था बस तोड़ा नहीं जाता था , फिर एक दिन पता चला खुशी मां बनने वाली है ये बात फ़ोन करके उसने विश्वास को बताई उसने सुनते ही फ़ोन काट दिया ।

वह सोच में पड़ गया अब वो क्या करे अपना कैरियर देखें या खुशी के परिवार को या इस बच्चे को वह तो वैसे भी इस रिश्ते से आज़ाद होना चाहता था तो ये बहाना सबसे ज्यादा काम मे आने वाला था । उसे अपना ये पहला प्यार बचपना नज़र आने लगा और खुशी पैरो में पड़ी जंजीर ।

अगले दिन वह उससे मिलने उसके घर गया खुशी भी परेशान थीं क्योंकि कल अचानक से फोन कटने के बाद विश्वास का फोन लगा ही नहीं था वो उसका जवाब सुनने के लिए परेशान थीं वो उसके सामने बैठा था और उसने सिर्फ़ एक ही बात पूछी ये बच्चा किस का हैं ?

उसके कानों में ये सवाल गूंजता ही रह गया ।
उसने उसको जवाब दिए बिना उसे बाहर का रास्ता दिखा दिया , और वो तन्हाई में बैठी उसके उन लफ्जों को याद करने लगीं ……….. मुझ पर विश्वास करो मैं सब कुछ संभाल लूंगा ….. सब कुछ ।
उसने बहुत कोशिश की उसके बिना रहने की पर दिल तन्हाई में माना नहीं वो विश्वास के घर उससे बात करने गई शायद सब कुछ ठीक हों जाए मुझे उससे बात करनी चाहिए हों सकता हैं उसे कोई गलत फहमी हों ।
ये सारे सवाल उसके मन में थे जब वो उससे मिली तो उसे समझाने लगीं उसने कहा मैं समझता हूं पर तुम्हे मेरा एक काम करना हैं वो सब कुछ करने को तैयार थी

उसने बाईक निकाली और उसे बैठा कर डाक्टर के पास ले गया खुशी ने पूछा हम यहां क्यूं आए हैं ?

Jindgi part 4
डीएनए टेस्ट करवाने के लिए विश्वास जानता था खुशी इसके लिए कभी नहीं मानेगी और उसका तीर एक दम निशाने पर लगा ।
खुशी का स्वाभिमान उसके सामने आ गया वह उसे छोड़ अपने रास्ते चल दी ।
अकेले सफ़र में ।

आज फिर उसकी जिंदगी एक मर्द की वजह से बिखर गई क्या उसने उस पर विश्वास करके कोई गलती करदी ।
क्या सारे मर्द एक ही जैसे होते हैं बचपन से सुना था आज़ फिर ये सवाल उसके मन में आया पर दिल मानने को तैयार नहीं हुआ ।

आखिर में फिर उसका साथी ये जिंदगी और तन्हाई रह गई जो कभी बेवफ़ा नहीं होती।