JINDGI (PART 3)

By | October 5, 2021

कोई तो बात थी उन दोनों में और उस मुलाकात में वरना , पहली बार मिलने पर तो ऐसा नहीं होता, ना इतना कुछ होता तो शायद ये कोई भगवान का ही करिश्मा था।

jindgi

 

वो उसे स्कूल के दरवाज़े पर छोड़ कर वापस आ गैर और दोबारा अपने इस्त्री के काम में व्यस्त हो गई पर बार बार उसी का चेहरा सामने आ रहा था, सोच रही थी शायद ही आज मां इतनी दूर से मिली हैं वो ना होता तो आज क्या होता।

और उधर एग्जाम हॉल में बैठे उसका भी ध्यान बार बार उसके खूबसूरत चेहरे पर जा रहा था।

वो एहसास जो उसे हुआ था उसे वो दोबारा महसूस करना चाहता था क्योंकि इससे पहले ऐसा कभी नहीं हुआ था।

आज 12 वीं का आख़री इम्तिहान था उसे डॉक्टर बनना था , पर फिलहाल कुछ वक्त के लिए चिंता खत्म थीं ।

अगली सुबह वो जोगिंग के लिए निकला पता नहीं कैसे पर उसके पैर खुद बा खुद उसके घर के सामने पहुंच गए । वो सुबह सुबह अपनी इस्त्री की दुकान लगा कर खड़ी थीं और वो उसे छुप छुप कर देखने लगा कम से कम एक हफ्ता ऐसा चला वो पेड़ के पीछे से उसे छुप कर देख रहा था और पीछे से कुत्ता उस पर कूद पड़ा और वो दुम दबाकर भागने लगा और ठीक उसके पीछे जाकर छुप गया किसे पता था दोनों ही डरपोक निकलेंगे उछल कर मेज़ पर चढ़ गए डर के मारे चीखने लगे जैसे कुत्ता नहीं भूत पीछे पड़ गया हों एक दूसरे को डर कर ऐसे कस कर पकड़ा जैसे छोड़ना ही ना हो खैर ये तो डर के कारण था पर दोनों साथ में अच्छे लग रहे थे ।

उस कुत्ते का मालिक उसे पकड़ कर लें गया साथ ही माफ़ी भी मांगी वो दोनों शरमाते हुए नीचे उतर आए और एक साथ बोले am sorry ,,,, it’s ok .

हा हा हा हा हा… फिर मिलेंगे

 

JINDGI

Actually मैं रोज़ यहां walk करने आता हूं आपको देखता हूं रोज़ इस्त्री करते हुए बहुत अच्छा काम हैं आप बहुत कम उम्र इतनी मेहनत कर रही हैं

मुझे ये चीज़ बहुत अच्छी लगी आपकी मां ठीक तो हैं , आप शादी क्यों नहीं कर लेती ,

ओह am sorry वो इतना परेशान हों गया के बिना सोचे समझे बोलता चला गया ।

अरे हां, आपकी तो बूढ़ी मां हैं आप अभी तो शादी कर नहीं सकती उनके बाद ही कुछ सोचा जा सकता हैं ।

Oh my god ,.. oh my god .. am sorry am sorry

वो बस यहीं कहते कहते चला गया ।

Jindgi ( part 2)

पूरे दिन यही सोचता रहा ये मैने क्या कर दिया ना रात को सो सका ।

अगले दिन फिर वहां गया वो उससे माफ़ी मांगना चाहता था जाकर बोला कल मैंने जो कुछ कहा उसके लिए मैं माफ़ी मांगना चाहता हूं कल जो कुछ मैंने कहा वो सब मैं गलती से कह गया ,

वैसे आपने कल बहुत कुछ कहा था आप किस बात के लिए माफ़ी मांग रहे हैं वो बोली ,

फिर उसने कहा अरे मैंने कल बहुत कुछ बोल दिया था फिर मैंने आपकी मां के लिए जो बोला मैं उसके लिए माफ़ी चाहता हूं ।

वो बोली अच्छा ठीक हैं वैसे तुम्हारा नाम क्या हैं

विश्वास ..

अच्छा … चाय पियेंगे वो बोलीं

नही नहीं। विश्वास ने कहा

अच्छा तो ठीक हैं वो आगे चल दी

वो परेशान हो गया बोला अरे आप ने दोबारा पूछा ही नहीं मुझे पीनी हैं और मां से भी मिलना हैं ।

पर अभी आप ही तो मना कर रहे थे अब अचानक क्या हुआ उसने पूछा ।

कुछ नहीं बस अचानक से भूख लग गई चले ना अब विश्वास ने कहा ।

नमस्ते ! आंटी कैसी हैं आप ।

मैं ठीक हूं। तू बता तेरे बच्चे ठीक है ?

इन्हें भूलने की बीमारी तुम भूल तो नहीं गए । उसकी बेटी बोली

नहीं नहीं मुझे याद हैं भूलने की बीमारी इन्हें हैं मुझे थोड़े ही हैं आप चाय बना कर लाए ना please बहुत भूख लगी है।

हा हा जाती हूं , वो बोली।

वो 3 कप चाय बनाकर ले आई ।

आप चाय बहुत अच्छी बनाती हैं ।

शुक्रिया , वह बोली ।

वैसे ये अब तो घर का रास्ता नहीं भूली ।

नहीं अब तो काफ़ी ठीक हैं पहले से , वह बोली ।

अच्छी बात हैं आपको इनका इलाज़ ठीक से कराना चाहिए ।

जी ।

वैसे आपका का exam ठीक से तो हो गया था न उसने पूछा ।

हा बहुत अच्छा हुआ था , वह बोला ।

अच्छा विश्वास

हा पर , पहले आप अपना नाम बताइए ।

अरे हां , मेरा नाम खुशी हैं ।

सच में ,

नही झूठ में ।

अरे नहीं नहीं मेरा मतलब बहुत अच्छा नाम हैं , मेरी मां का नाम भी खुशी था ।

था मतलब ? खुशी ने पूछा

मतलब पिछले साल उनका देहांत हो गया । बोलते बोलते उसकी आंखे गीली हों गई ।

उसने पूछा कैसे हुआ ये सब ।

भगवान की मर्ज़ी , एक दुर्घटना में मारी गई ।

बड़ा दुख हुआ सुनकर ।

अच्छा बताओ तुम्हारा रिजल्ट कब आ रहा है , खुशी ने पूछा ।

विश्वास बस आने ही वाला हैं एक महीने में आना वाले हैं ।

और आगे का प्लैन क्या हैं ? खुशी ने पूछा

बस डॉक्टर बनना हैं ।

क्यों ? खुशी ने पूछा

क्योंकि मां का यहीं सपना था न ।

अच्छा ।

धीरे धीरे से थोड़ी बहुत यहां वहां की बाते हुई ।

और कुछ आधा घंटा बीत गया ।

वह बोली , मुझे थोड़ा काम हैं ।

क्या काम हैं ? वो अभी जाना नहीं चाहता था उसे उससे और बाते करनी थीं ।

वो बोली मुझे कपड़े इस्त्री करने हैं ।

थोड़ा काम हैं नहीं तो मैं ज़रूर तुमसे बात करती ।

कल आप फिर आना हम बहुत सारी बाते करेंगे , अच्छा अभी मैं चलती हूं ।

आज इतवार हैं बच्चो की स्कूल की छुट्टी थीं , सब घर पर ही थे वो उसे भी कोई काम न था सो वो भी बच्चो के साथ घर पर थीं ।

वॉक करने गया तो वह वहां न दिखी तो सोचा घर में ही चला जाऊ दरवाज़ा खुला तो एक बच्चा सामने था ।

बच्चा ! ?? उसे कुछ समझ नहीं आया बेटा वो जो इस्त्री करती हैं क्या वो घर पर हैं ?

आप मम्मी को पूछ रहे हो , हा वो हैं ।

क्या !

उसके दिल पर जैसे तूफ़ान आया और सब कुछ बर्बाद कर के चला गया क्या ये सच हैं ऐसा देखने में तो नहीं लगता क्या ये सच हैं , उसने जिक्र तो नहीं किया ।

कोई बात नहीं मै उसके मुंह से सुनना चाहता हूं हिम्मत करके वो आगे गया अंदर तो पूरे 4 बच्चे थें

है भगवान ! क्या हैं ये । उसने मन में कहा ।

Hi यहां से गुजर रहा था आप दिखी नहीं तो सोचा देखता चलू कोई परेशानी तो नहीं है ।

ये बच्चें आपके हैं ?

हां ।

चारो ?

अरे नहीं ! दो मेरे हैं और ये दोनों मेरी बहना के हैं ।

अच्छा आपके पति कहां हैं मैं उनसे मिलना चाहता हूं इतने प्यारे बच्चे हैं आप पर गए हैं या उन पर।

विश्वास अब हम साथ नहीं रहते ।

ओह अच्छा !

क्या मुझे चाय मिल सकती हैं ?

हा , ज़रूर। खुशी बोली ।

वो वहा से चाय पी कर निकल गए , पर रस्ते और घर से मतलब नहीं था , बिस्तर पर रात करवटें बदलती बदलती गुजर गई और मन में एक ही सवाल घूम रहा था

मैं अब क्या करूं वो जो मेरे दिल में प्यार हैं उसका वो अपने पति के साथ नहीं पर बच्चे तो हैं क्या मैं उनकी जिम्मदारी लें पाऊंगा क्या वो भी मुझसे प्यार करेंगी क्या उन बच्चों का बाप मैं बन पाऊंगा नहीं क्या करू क्या नहीं दिल उलझन में आंखे आसूं में और तकिया पानी में पूरी रात सिलसिला ऐसे ही चलता रहा रहा ।

अब विश्वास क्या करेगा क्या उसे उसकी खुशी मिल पाएगी वो किसे चुनेगा खुशी को या दुख को ।

और क्या खुशी उस पर विश्वास कर पाएगी उसे अपना बनाएगी ।

जानने के लिए पढ़ते रहे …….. जिन्दगी