DIARY

By | September 29, 2021

 

  वह एक बारिश की रात थी। बारिश का जोर इतना ज्यादा तो नही था, लेकिन किसी शख्स को भीगा दे, हां उतनी बारिश तो थी। मेन रोड पे बारिश के कारण काफी ट्राफिक लगी हुई थी।

 

  उसी मेन रोड की बगल में एक cafeteria के बाहर रौनक अपना छाता लेकर खड़ा था। उसने अपनी बायीं हाथ की कलाई में बांधी हुई अपनी घड़ी में देखा, घड़ी में आठ बज चुके थे। उसने अपनी पैंट की जेब से एक छोटी डायरी निकाली। डायरी के काफी सारे पन्ने भरे हुए थे।

उसने सीधा आखरी पन्ना खोला, जिसपर लिखा था ‘To say I love you to priya (8 pm. -cafeteria)’ उसने वो डायरी बंद कर अपनी जेब मे वापस रख दी। उसकी चेहरे पर एक अलग ही मुस्कान छायी थी, जो अक्सर आशिकों की चेहरे पर पायी जाती है। वो cafeteria की सीढ़ियां चढ़ के ऊपर आया और दरवाजे के पास आ के खड़ा हो गया।

उसने अपना छाता बंद किया और दरवाजे के बाजुमें गीले छाते रखने के लिए रखे गए एक बिन में डाल दिया।

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छाता हटने के बाद अभी रौनक का चेहरा काफी सांफ दिख रहा था। उसने अपना सर हिलाया, छाता होने के बावजूद भी बारिश ने उसे थोड़ा भीगा दिया था। उसके घुंगराले बालो से उसने पानी हटाया और फिर अपने गीले जूते बाहर रखे पोछे से साफ किये। उसने सफेद रंग की शर्ट पहनी हुई थी जिसपे पिंक और ब्राउन कलर की लाइनिंग थी और ब्राउन कलर की पैंट पहनी हुई थी। उसके जूते और कपड़े काफी नए लग रहे थे। वो उस पेहराव में काफी खूबसूरत नजर आ रहा था। उसने अपनी शर्ट ठीक की और दरवाजा खोलकर वो अंदर आ गया।

 

  अंदर cafeteria में काफी शांती थी। वेटर्स और क्लीनर्स के अलावा वहां कोई भीड़ नही थी। कोने में सामने दीवार की तरफ मुँह कर के बस कोई एक बुजुर्ग आदमी हाथ में शाम का अखबार लेके बैठा था। बीच बीच में चाय की चुस्की भी ले रहा था। रौनक ने चारों ओर देखा, सारे टेबल खाली थे तो उसने मन में ही एक टेबल तय किया और वहां जा कर बैठ गया। 

 

वो प्रिया की राह देख रहा था। उसे आज अपने दिल की बात कहनी थी। वो काफी बैचैन नजर आ रहा था। तभी एक वेटर ने उसके पास आके पूछा,

 

वेटर: क्या लेंगे सर?

 

रौनकने इशारों से ही उसे वेट करने के लिए कहा। वेटर वहासे चला गया। रौनक की बैचेनी फिर भी कम नही हो रही थी। आज तक उन दोनों ने सिर्फ एक दूसरे को देखा था। उन दोनो में कभी कोई बात हुई थी। पर रौनक प्रिया को बेहद पसंद करता था। और अब एक डायरी ने उनकी मुलाकात की पहल की थी। अभी पहली बार जब प्रिया से मिलुंगा तो क्या कहना चाहिये? बातों की शुरुआत कैसे करूँगा? ऐसे कई सवाल उसे खा रहे थे। वो आंख बंद करके मुँह में ही कुछ रटे जा रहा था।

 

रौनक: हाय…हैल्लो….वेलकम…..थैंक्स फ़ॉर कमिंग…नही नही थैंक्स और वेलकम एकसाथ कैसे कह सकता हूं….यु आर लुकिंग नाइस…हां यह भी ठीक रहेगा।

 

रौनक यह सब रटे जा रहा था। तभी जिसका इंतेज़ार हो रहा था, वो वहां पहुँच गयी। प्रिया ने पीछे से ही रौनक को पहचान लिया और वो टेबल के पास पहुंच गई।

 

प्रिया: सॉरी…सॉरी…सॉरी… I made you wait. वो मेरी स्कूटी…

 

प्रिया की आवाज कानों में पड़ते ही रौनक खड़ा हो गया। और ‘हाय’ बस इतना ही हकलाक़े के कह पाया। और बस प्रिया को देखता ही रह गया। बारिश से भीगकर प्रिया की खूबसूरतीका कुछ अलग ही कहर था। उसके गीले बाल, पानी की बूंदों से सजा चेहरा और और बदन से चिपके उसके गीले कपड़े खूबसूरती की अलग ही संज्ञा बता रहे थे। उस समय प्रिया को अगर कोई देखता तो रौनक की तरह ही धुंद होकर बस उसे देखता ही रहता।

 

प्रिया: हां, मैं थोड़ा भीग गई, वो मेरी स्कूटी रास्ते में बंद हो गई थी, चालू ही नही हो रही थी। फिर मुझे रास्ते से किसी की हेल्प लेनी पड़ी।

 

रौनक: तो..तो…मुझे कॉ…कॉ… कॉल कर दिया होता, मैं… मैं… आ जाता।

 

प्रिया: नहीं कोई बात नही, और वैसे भी मुझ जैसी खूबसूरत लड़की की गाड़ी अगर खराब हो जाये, तो कोई न कोई मदद के लिए आता ही है। यह मुझे पता था। तुम यकीन नही करोगे तीन लोग रुके थे मेरी स्कूटी ठीक करने।

 

प्रिया और रौनक दोनो हँसे, धीरे धीरे हंसी रुक गयी। प्रिया ने अपना मोबाइल उठाया। बारिश की वजह से वह भीगा तो नही वो चेक करने लगी। उसने अपनी पीठ पर बिछे अपने लंबे बाल दूसरे हाथ से आगे लिए। वो बला की खूबसूरत लग रही थी। रौनक उसे देखे ही जा रहा था, सही भाषा में कहे तो वो उसे ताड़ रहा था। तभी प्रिया ने अपना फोन वापस टेबल पर रखा और रौनक की तरफ देखा। रौनक अभी भी उसे देख रहा था, तो प्रिया ने अपनी एक भौं ऊपर कर उसे देखा।

 

प्रिया: कुछ बोलोगे भी या ऐसे देखते ही रहोगे?

 

रौनक ने अपनी नजरे हटा ली और पूछा

 

रौनक: तु…तुम कुछ लोगी?

 

रौनक ने मेनू कार्ड अपने हाथ में लिया, तभी प्रिया बोली,

 

प्रिया: यहां cappuccino काफी अच्छी मिलती है।

 

रौनक ने वेटर को बुलाने के लिए हाथ ऊपर किया, लेकिन प्रिया ने तभी ‘वेटर’ पुकार लगा दी। एक वेटर उनके पास आया और पूछा,

 

वेटर: what do you like to have madam?

 

प्रिया: two cappuccino, one without sugar and..तुम शुगर लेते हो?

 

रौनक: हां थोड़ी..

 

प्रिया: one with minimum sugar.

 

वेटर आर्डर लेके चला गया। वापस दोनों में एक चुप्पी थी। रौनक फिर प्रिया को देखने में व्यस्त था और प्रिया अपनी बाल सुखाने में। प्रिया ने वापिस रौनक की तरफ देखा।

रौनक ने नजरे चुरा ली, और फिर कहाँ

 

रौनक: तु…तु… तु… म काफी खूबसूरत लग रही हो।

 

प्रिया: थैंक्स… लगता है तुम जानते हो कि लड़कियों को तारीफ पसंद होती है। तो..?

 

रौनक: तो..?

 

प्रिया: शशांक ने कहाँ तुम मुझसे मिलना चाहते हो।

 

रौनक: श..श..शशांक..? एक मिनट

 

रौनक अपनी जेब से मोबाइल निकालता है। एक फ़ाइल ओपन करता है। वहा पे सर्च बार ओपन करता है और वहां शशांक नाम डालता है। वहां शशांक की एक तस्वीर आती है, नीचे उसका नाम लिखा हुआ होता है, और उसके ठीक नीचे उसकी पहचान Classmate/Neighbour.

 

रौनक: हां…हां… शशांक। वो डा…डा… डायरी..

 

प्रिया: हां डायरी… मैं लायी हूँ। वैसे में शशांक के पास ही देने वाली थी फिर उसने कहाँ की तुम खुद मुझसे मिलके यह डायरी लेना चाहते हो, उसने मुझसे कहा तुम्हे कुछ बात भी करनी है।

 

प्रिया ने अपनी बैग से एक डायरी निकाली

 

प्रिया: तो मैंने सोचा कि क्यो ना मैं भी डायरी के मालिक से मिल लू। यह रही तुम्हारी डायरी।

 

रौनक ने डायरी लेने के लिए हाथ बढ़ाया तो प्रिया ने वापिस डायरी पीछे खींच ली।

 

प्रिया: कांफी अच्छी कवितायें लिखते हो तुम।

 

रौनक: को…शीश कर लेता हूँ।

 

प्रिया: मैं तुम्हारी बहुत शुक्रगुजार हूं कि तुम यह डायरी क्लासरूम में ही भूल गए। मुझे इतने महान कवी की महान कवितायेँ जो पढ़ने मिली।

 

रौनक: महान कवि, यह कुछ ज्या…ज्यादा हो गया।

 

प्रिया: कुछ ज्यादा नही, मैने तुम्हारी सारी कविताये पढ़ ली है। गुमशुदा, भीड़, एक बरसात, अंधेरी रात, झुंड क्या एक से बढ़कर एक रचनाये है तुम्हारी, और मेरी सबसे फ़ेवरेट उड़ान,

पंछी बन कर उड़ता मैं,

ऊंची उड़ान भरता जाता हूं।

 

रौनक & प्रिया: बादलों से भी उडु ऊँचा

                    फिर भी नई उड़ाने खोजे जाता हूँ।

 

प्रिया: तुम हकलाते हो, पर अपनी लिखी पंक्तिया साफ बोलते हो।

 

रौनक मुस्कुराता है।

 

प्रिया: मैने कॉलेज में कभी तुम्हे किसीसे बात करते नही देखा।

 

रौनक: शायद मेरे ह..ह..कलाने के वजह से मेरा कोई दोस्त नही। लो..ग कहते है कि मैं उन्हें ई..ई…ईरिटेट करता हूं।

 

प्रिया: इतनी देर से मै तुम्हारे साथ बैठी हूँ। मुझे तो इरिटेट नही किया तुमने।

 

रौनक: सभी को नही होती शायद, जैसे शशांक, वो मैनेज कर लेता है मुझसे बात करना।

 

प्रिया: तो जो लोग तुम्हे इग्नोर करते है, या इरिटेटिंग समझते है, उनसे तुम्हे कोई फर्क नही पड़ता।

 

रौनक: लोगो की बातों से क्या फर्क पड़ना।

 

तभी वेटर उनकी आर्डर लेके आया।

 

वेटर: madam, your cappuccino without sugar and sir, your cappuccino with minimum sugar.

 

प्रिया: थैंक यू।

 

वेटरने ट्रे लेकर एक हल्की सी स्माइल दी और वो निकल गया

 

प्रिया: फिर तो काफ़ी शिकायते होंगी तुम्हे दुनिया से।

 

रौनक: जो मुँह मोड़ लेते हैं, उनसे क्या ही शिकायत करना। 

 

फिर अपने बाजू में रखी डायरी रौनक ने देखी।

 

रौनक: वैसे मैं सारी शिकायते इस डायरी के पन्नो में दर्ज रखता हूँ। शब्दो में कैद कर रखता हूँ। जिसे तुम कविता कहती हो।

 

पीछे बैठा बुजुर्ग आदमी ने अपने जूतों से दो बार जमीन पे tap किया।  प्रिया हल्की नजर से पीछे देखा और फिर अपनी घड़ी की तरफ। 8.30 बजने ही वाले थे। प्रियाने अब जल्दबाज़ी दिखाई।

 

प्रिया: तुम मुझसे कुछ कहना चाहते थे।

 

रौनक: हां मैं कुछ कहना चाहता हूँ।

 

अचानक से रौनक का सर थोड़ा भारी होने लगा।

 

प्रिया: क्या तुम ठीक हो?

 

रौनक: हां मैं ठीक हूँ।

 

फिर रौनक ने गहरी सांस ली और कहाँ,

 

रौनक: मेरी जिंदगी में, इस डायरी के अलावा एक और जरूरी चीज है।

 

प्रिया: वो क्या?

 

रौनक: तुम प्रिया।

 

प्रिया चौक जाती है, और धीरे धीरे रौनक के चेहरे के भाव भी बदलने लगते है।

 

रौनक: प्रिया, जब भी तुम कही भीड़ में खड़ी रहती हो तभी कोने में अकेला खड़ा मैं बस तुम्हे ही देखता रहता हूँ। कॉलेज की कैंटीन हो, क्लासरूम हो या ऑडिटोरियम मेरी नजर तुमसे नही हटती। मेरे हकलाने के वजह से मैन तुमसे कभी बात नही की, पर ख़यालों हमने ऐसी काफी सारी मुलाकातें की हैं।

मैं हररोज तुम्हें चुपके से देखता हूँ, तुम्हारी हर एक झलक को आंखों में कैद करता हूँ। तुम्हे कभी कभी मैं अपनी हाटों लकीरों से भी जोड़ता हूँ। प्रिया मैं तुमसे बेहद प्यार करता हूँ, क्या तुम भी मुझसे प्यार करती हो।

 

प्रिया चौंक जाती है। उससे ज्यादा वो डरने लगती है, जैसे जैसे रौनक की चेहरे पर भाव बदलते जाते है।

 

रौनक: चुप क्यों हो प्रिया? तुम जवाब  क्यो नही दे रही.. जवाब दो…जवाब दो…

 

रौनक पागलो जैसा एक ही लूप दोहराता है ‘जवाब दो..जवाब दो…’

 

प्रिया: मैं..मैं..

 

प्रिया बौखला जाती है। उसे आगे क्या कहना था अब याद नही। तभी उनके पीछे बैठे उस बुजुर्ग शख्स ने कुछ लिख के वेटर की हाट में दिया और प्रिया को देने के लिए कहा। वेटर प्रिया के पास आया और उनके हाथ में वो चिठ्ठी थमा दी। प्रिया ने चिट्ठी खोलकर देखा उसमे लिखा था, ‘डायरी खोलो’।

 

प्रिया ने तुरंत डायरी खोली और वो एक पन्ने पे पहुंच गई, उसने वही कुछ ढूंढा और वो पढ़ने लगी।

 

प्रिया: हा भीड़ में जब तुमने मुझे देखा था। तब मैने कोने में दूर खड़े तुम्हे भी देखा था। तुम जब भी चुपके से मुझे देखते  हो तो मुझे खबर होती है यह तुम्हे मालूम नही। मै भी तुमसे कुछ कहना चाहती हूँ, अब ख़यालों में या झूटे लकीरों में नहीँअब असल में मुझे तुम्हारे साथ रहना है, तुम्हारे लकीरों से जुड़ना है। तुम्हारी डायरी पढ़कर मैं तुम्हे अब जान चुकी हूँ.. हां मैं भी तुमसे प्यार करती हूँ।

 

प्रिया ने डायरी बंद की और ऊपर देखा। रौनक की नजर आँसूओ से भरी हुई थी। उसे खुशी फुली नही समा रही थी। वो मुस्कुरा रहा था और खुशी से कांप भी रहा था। रौनक ने फिर प्रिया का हाथ अपने हाथों में लिया और एक नजर अपनी भरी हुई निगाहों से उसे देखने लगा।

 

पीछे बैठे उस बुजुर्ग आदमी ने एक चम्मच उठाया और जमीन पर गिरा दिया। शायद ये प्रिया के लिए सिग्नल था। प्रिया ने अपनी घड़ी में देखा। 8.30 बजे हुए थे। उसने रौनक का हाथ और कसके पकड़ा और कहाँ,

 

प्रिया: रौनक, अपनी आंखें बंद करो।

 

रौनक ने रोते हुए अपनी गर्दन हिलाक़े नही का इशारा किया।

 

प्रिया: भरोसा रखो और आंख बंद करो।

 

रौनकने धीरे धीरे अपनी आँखें बंद की। प्रियाने अपना हाथ उसके हाथ से निकाल लिया और वो वहाँ से चली गयी। रौनक का शरीर अचानक से कापने लगा जैसे उसे तेज सर्दी भर आयी हो। तभी वो बुजुर्ग आदमी अपने जगह से उठा और रौनक के सामने आ कर बैठ गया। उसने टेबलपर रखी डायरी अपनी कोट के अंदर की जेब में रखा। उसने रौनक का हाथ अपने हाथ में लिया और कहाँ। वो बुजुर्ग आदमी और कोई नही रौनक के पापा थे।

 

पापा: इट्स ओके..इट्स ओके.. सब ठीक हैं।

 

रौनकने अपनी आंखें खोली।

 

रौनक: आप कौन, और मैं यहां क्या कर रहा हूँ?

 

पापा: मैं तुम्हारा पापा हूँ बेटा।

 

रौनक अपना मोबाइल निकाला और उसी फ़ाइल में पापा के नाम से सर्च किया। वहां पर उनकी ही फ़ोटो थी। रौनक को अब यकीन हुआ कि वही उसके पापा है।

 

रौनक: हा पापा।

 

पापा: घर चले?

 

रौनक और उसके पापा cafeteria से बाहर आये। रौनक के पापा ने umbrella bin से दोनों छाते उठाये और एक रौनक की हाथ में थमा दिया। रौनक धीरे धीरे सीढिया उतरने लगा, उसके पीछे उसके पापा भी।

 

रौनक: ए… ए… एक्सक्यूज़ मि!

 

रौनक के सामने सीढियो पे प्रिया खड़ी थी पर रौनक ने उसे पहचाना नहीं। उल्टा रास्ते से हटने के लिए कहा। फिर उसके पापा ने उसे गाड़ी में बिठाया और वो वापिस प्रिया के पास चले आये। उन्होंने अपने कोट की जेब से वो  डायरी निकाली।

 

पापा: रौनक की डायरी।

 

प्रिया ने वो डायरी हाथ मे ली।

 

पापा: और यह तुम्हारे पैसे।

 

प्रिया: माफ करना अंकल, वो गीता नही आ सकी तो आज मुझे आना पड़ा। वैसे मुझे उसने सब समझा दिया था पर आखिर में मैं बौखला गयी।

 

पापा: अगली बार अगर आओगी तो बौखलाना मत।

 

रौनक के पापा निकलने लगे तभी प्रिया ने उनसे पूछते हुए उन्हें रोका

 

प्रिया: उन्हें क्या हुआ है अंकल?

 

पापा: बेटा, वो किसी याद में कैद है। जिंदगी वो पल जो उसने कभी जिया ही नही वो वह हररोज जी रहा है।

 

प्रिया: मतलब?

 

पापा: दो साल पहले वो यहाँ आया था, लेकिन प्रिया नही आयी। वो प्रिया से प्यार का इजहार करना चाहता था। पर उसने मौका ही नही दिया। रौनक का दिल टूट गया। अब जो मुलाकात यहां ना हो पायी वो उसने अपनी कविताओं की डायरी में कैद करली।

वो हररोज उठता है और इस डायरी में लिखी वो आधे घंटे की मुलाकात रोज जीता है। हमें बहुत बाद में पता चला की रौनक को दिमाग की बीमारी है। dementia के कारण वो हम सबको भूल चुका है उसके लिए हमारी पहचान बस उसकी मोबाइल में कैद है, और उसकी कहानी इस डायरी में।

 

प्रिया: इसका कोई इलाज।

 

पापा: बस यही लूप रोज चलना चाहिए बस यही एक इलाज है। क्योंकि उसके यादों में बस यही एक मुलाकात हैं जो बची है। और यहीं मुलाकात है जो उसे जिंदा रखी हुई है।

 

रौनक के पापा ने अपने आंसू पोछे।

 

पापा: गीता को बोलना कल वक्त पर आ जाये।

 

रौनक के पापा गाड़ी की ओर बढ़े और फिर मुड़ के उसने उस लड़की से पूछा।

 

पापा: वैसे तुम्हारा नाम क्या है?

 

प्रिया: coincidentally, प्रिया।

 

रौनक के पापा ने मुस्कुराया, और वो गाड़ी में बैठे। बारिश अब काफी कम हो गयी थी। रोड पर ट्रैफिक भी नही थी अब उनकी गाड़ी घर की ओर निकल पड़ी।

 

Shubham shimpi