खाली जेब और संघर्ष

By | September 26, 2021

खाली जेब और संघर्ष
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सन 1980 में दिल्ली के पटपड़ मैं हुआ घर में खुशियों का माहौल था क्योंकि सरना खानदान में पहला वरीस था जो हुआ था। घर बड़े जोर शोर से अपने खानदान के बेटे का स्वागत किया और उसका नाम जतिन रखा जतिन शुरुआत से जैसे-जैसे बड़ा होता गया फाइनेंस को लेकर के उसकी चिंताएं बढ़ती गई। समय पर स्कूल की फीस जमा ना हो पाना दोस्तों के साथ पार्टी नहीं कर पाना यह सारी चीजें उसके अंदर थी।

Ext – outside of school /1.30pm lunch time
Jatin with his four friend

साहिल – यार जतिन तेरा स्टाइल कमाल का लगता हैं आज कल ।
जतिन – आबे आने वाले सदी का अमिताभ बच्चन हु मै
साहिल –आबे हमारे कॉलोनी का वॉचमैन है वो ( साहिल के साथ उसके दोस्त भी हंसने लगते हैं)
जतिन तुम देखना मैं तुम सबको यह सारी चीजें करके दिखाऊंगा

साहिल और उसके दोस्त हंसने लगते हैं। जतिन को इस बात का बुरा लगता है और वह अंदर ही अंदर ठान लेते हैं कि एक ना एक दिन में सपने को जरूर पूरा करूंगा।

Int– jatin room
( Jatin stand in front of mirror and act like as a amitabh bachchan) उसकी मां यह सब करते हुए देख लेती हैं

मां – बेटा पहले पढ़ाई पे ध्यान दे ले ।
जतिन – मां देखना एक दिन मैं स्टार बनूगा।
मां –( हस्ती हुई ) मैं भी अपनी मां से कहा करती थी की मैं नूतन जी जैसा अभिनेत्री बनूगी ।
जतिन – मां आपने कोशिश क्यों नही की अभिनेत्री बनने की
मां –बेटा कुछ सपने सपने ही रहे तो अच्छा है
जतिन – मां पर मेरा सपना सपना नही रहेगा देखना
मां – मुश्कुरा कर जतिन के सर पे हाथ रख कर कमरे से बाहर निकल जाती हैं।

जतिन दोबारा शीशे के सामने खड़ा होता हैं और बोलता है की मैं इसे पूरा करूंगा।

जतिन अपनी दसवीं तक के पढ़ाई को कंप्लीट करता है इसके बाद दिल्ली में थिएटर ज्वाइन करता है इसके बाद पिक्चरों में ऑडिशंस देता है काफी संघर्ष के बाद उसको पहली पिक्चर मिल जाती है जिसका नाम मेरठिया गैंगस्टर होता है और उसके बाद इस का सिलसिला चलाता ही जाता है उसके अभिनय से प्रसन्न होकर उसके पहले फिल्म के डायरेक्टर ने सेक्रेट गेम जैसी बड़ी वेब सीरीज में कास्ट किया यह कहानी है जतिन सरना की